✍️महिला समूह की फूड कैंटीन का शुभारंभ, स्वरोजगार को मिली नई उड़ान👉

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चम्पावत UK                                                                 चम्पावत 👉 मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की “आदर्श चम्पावत” परिकल्पना को साकार करने की दिशा में जनपद में महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के प्रयास लगातार जारी हैं। इसी क्रम में विकास भवन परिसर में महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित फूड कैंटीन का शुभारंभ जिलाधिकारी मनीष कुमार ने किया।

 

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत डाड़ाबीस्ट निवासी श्रीमती रितु कुलेठा को अनटायड फंड से 65 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई, जिसके माध्यम से उन्होंने फूड कैंटीन की स्थापना कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया है। जिलाधिकारी ने फीता काटकर कैंटीन का उद्घाटन किया और महिला उद्यमी के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।

 

जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं आज आत्मनिर्भर भारत की सशक्त पहचान बन रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें सम्मानजनक स्वरोजगार उपलब्ध कराना है। उन्होंने महिलाओं से समाज में सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा बनने का आह्वान किया।

 

अपर परियोजना निदेशक (एपीडी) विम्मी जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाकर स्थायी आजीविका उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है तथा विभाग महिलाओं को हरसंभव सहयोग देता रहेगा।

 

इस दौरान विकास भवन के अधिकारी, एनआरएलएम से जुड़े कार्मिक, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं और अन्य गणमान्य मौजूद रहे। महिला समूहों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी सहयोग से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है।

 

केलपाल बाबा स्वयं सहायता समूह बना मिसाल

 

एनआरएलएम के तहत गठित केलपाल बाबा स्वयं सहायता समूह भी महिला उद्यमिता का सफल उदाहरण बनकर उभरा है। समूह की सदस्य श्रीमती पार्वती “पार्वती टिफिन सर्विस” का संचालन कर रही हैं। इसके साथ ही वे विभिन्न आयोजनों के लिए कैटरिंग और पार्टी ऑर्डर की सेवाएं भी उपलब्ध करा रही हैं। समूह को आजीविका गतिविधियों के विस्तार के लिए रिवॉल्विंग फंड से 25 हजार रुपये तथा सीआईएफ (CIF) फंड से 75 हजार रुपये की सहायता दी गई है। इससे समूह की आय में वृद्धि होने के साथ स्थानीय स्तर पर अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।


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