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पिथौरागढ़ UK
बेरीनाग👉नगर की तीन प्रमुख समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर सोमवार से बेरीनाग में चरणबद्ध आंदोलन शुरू हो गया। व्यापार संघ, स्थानीय जनता और छात्रसंघ के संयुक्त नेतृत्व में शहीद स्मारक पर क्रमिक अनशन शुरू किया गया। आंदोलनकारियों ने महाविद्यालय को जोड़ने वाले जर्जर मोटर मार्ग के सुधारीकरण, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बेरीनाग को उप जिला चिकित्सालय का दर्जा देने तथा महाविद्यालय के खेल मैदान में स्टेडियम निर्माण की मांग उठाई।
आंदोलन के पहले दिन व्यापार संघ अध्यक्ष राजेश रावत, पूर्व सैनिक गणेश सिंह रावत, हीरा मियां, पदमा धामी और शशिकला राठौर क्रमिक अनशन पर बैठे। इस दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
व्यापार संघ अध्यक्ष राजेश रावत ने कहा कि इन तीनों मांगों को लेकर मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों को कई बार ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा और सभी सामाजिक संगठनों से सहयोग की अपील की।
आंदोलन में शामिल महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया तो आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार पर भी विचार किया जाएगा। उनका कहना था कि जब मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है तो मतदान का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
इस दौरान पूर्व सैनिक जीएस धामी, व्यापार संघ उपाध्यक्ष कमल खाती, सचिव अमित पायल, जिला उपाध्यक्ष कमलेश पंत, दीपक बोरा, छात्रसंघ महासचिव जीवीतेश रौतेला, कोषाध्यक्ष आयुष सलौनी, मनीष रौतेला, निखिल धानिक, पवन कुमार डांगी, गंगा सिंह सामंत, दीपक बिष्ट, चंद्र सिंह कठायत, दीपक कालाकोटी, पुष्कर सिंह खष्टी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
80 वर्षीय हृदय रोगी पूर्व सैनिक भी अनशन पर
तीन सूत्रीय मांगों के समर्थन में 80 वर्षीय पूर्व सैनिक गणेश सिंह रावत भी क्रमिक अनशन पर बैठे। हृदय और मधुमेह से पीड़ित गणेश सिंह रावत ने कहा कि यदि शीघ्र मांगें पूरी नहीं हुईं तो वह आमरण अनशन शुरू करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
नाम सीएचसी का, सुविधाएं आज भी पीएचसी जैसी
स्थानीय लोगों का कहना है कि बेरीनाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को कागजों में सीएचसी बने लगभग दस वर्ष हो चुके हैं, लेकिन यहां आज भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के अनुरूप ही स्टाफ, दवाइयां और संसाधन उपलब्ध हैं। जबकि पिथौरागढ़ जिला अस्पताल के बाद सबसे अधिक मरीज इसी अस्पताल में पहुंचते हैं। अल्मोड़ा और बागेश्वर जनपद की सीमा से लगे गांवों के लोग भी उपचार के लिए यहीं आते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।










