✍️बनबसा नेपाल बॉर्डर पर ‘एंबुलेंस’ लिखें वहन से सवारी ढोने का मामला आया सामने, जांच की उठी मांग👉

✍️बनबसा नेपाल बॉर्डर पर ‘एंबुलेंस’ लिखें वहन से सवारी ढोने का मामला आया सामने, जांच की उठी मांग👉

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बनबसा Uk                                                            बनबसा👉भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा के बनबसा स्थित पिलर संख्या-7 से एंबुलेंस लिखे वाहन के जरिए सवारि ढोने का मामला सामने आया है।अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं है की एंबुलेंस लिखा हुआ वाहन,एंबुलेंस नियम के अंतर्गत पंजीकृत हैं या नहीं है कुछ वाहनों पर एक निजी अस्पताल का नाम अंकित है, जबकि एक वाहन पर “एंबुलेंस” लिखने के साथ हूटर भी लगाया गया है, लेकिन उसका उपयोग कथित रूप से सवारी ढोने के लिए किया जा रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमा खुलने के बाद प्रतिदिन सुबह लगभग 6 या 7 टैक्सी वाहन नेपाल से आने वाले मरीजों को सितारगंज स्थित अस्पताल तक पहुंचाते हैं। आरोप है कि इन मरीजों से अस्पताल पहुंचाने के नाम पर निर्धारित दर से अधिक किराया भी वसूला जाता है।यदि एंबुलेंस लिखकर उसका उपयोग व्यावसायिक सवारी ढोने के लिए किया जा रहा है, या टैक्सी वहां पर एंबुलेंस लिखा हुआ है तो यह दोनों ही स्थिति में नियमों के उल्लंघन का गंभीर मामला हो सकता है। जबकि एंबुलेंस में एक मरीज के साथ मात्र एक या दो मरीज के साथ के लोगों को बिठाया जाता है लेकिन हमें ज्ञात हुआ है की इसमें 10 से 12 सवारीयों को बैठा कर ले जाया जाता है यह अपने आप मे एक बड़ा सवाल है की सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों, पुलिस और परिवहन विभाग की इस ओर अब तक नजर क्यों नहीं पड़ी। स्थानीय वाहन चालकों का यह भी कहना है की अगर हमारे द्वारा वहां पर वाहन खड़े कर सितारगंज जाने वाली सवारियों को अपने वाहनों में बैठाने का प्रयास किया जाता है तो एंबुलेंस लिखे वाहन स्वामी द्वारा मारपीट वह अभद्र भाषा का प्रयोग कर, हमें वाहन पर सवारी नहीं बैठाने दी जाती है और अपनी पहुंच ऊपर तक होने की बात कह कर धमकाया भी जाता है

मामले को लेकर स्थानीय लोगों वह वाहन चालकों ने हमारी खबर के माध्यम से संबंधित विभागों से निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, इस पूरे प्रकरण में संबंधित अस्पताल और वाहन संचालकों का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।

बताया जा रहा है की इस मामले से जुड़े वाहन नंबरों और अन्य तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मरीजों की सुरक्षा और परिवहन नियमों से जुड़ा गंभीर मामला साबित हो सकता है।

अब देखना है की हमारी खबर के पश्चात प्रशासन हरकत में आता है या नहीं ?


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