✍️आधुनिक खेती से संवरी रघुवरदत्त की तकदीर, बने पहाड़ में औद्यानिकी की मिसाल👉

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चम्पावत UK                                                        चम्पावत👉आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर लोहाघाट विकासखंड के ग्राम भेंटी, डूंगरी फर्त्याल निवासी प्रगतिशील किसान रघुवरदत्त मुरारी ने खेती को बेहतर आय का जरिया बना दिया है। पॉलीहाउस में सब्जी उत्पादन से लेकर सेब, कीवी, मधुमक्खी पालन और वर्मी कम्पोस्ट तक उन्होंने कृषि को बहुआयामी स्वरूप दिया है।

लखनऊ विश्वविद्यालय से परास्नातक रघुवरदत्त को खेती की प्रेरणा अपने पिता धर्मानंद मुरारी से मिली। उन्होंने अपनी शिक्षा और आधुनिक सोच का इस्तेमाल पारंपरिक खेती को नई तकनीक से जोड़ने में किया। वर्तमान में उनके पास करीब 633 वर्गमीटर क्षेत्र में चार पॉलीहाउस हैं, जहां ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग के जरिए शिमला मिर्च, टमाटर, खीरा समेत विभिन्न सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है।

सब्जी उत्पादन के साथ उन्होंने फलोद्यान को भी आय का प्रमुख साधन बनाया है। उद्यान विभाग के सहयोग से करीब 60 सेब के पौधे लगाए गए हैं, जबकि लगभग 10 नाली भूमि में कीवी की बागवानी विकसित की गई है। कीवी में फल आने भी शुरू हो गए हैं। वर्ष 2025-26 में करीब ढाई नाली क्षेत्र में एम-9 प्रजाति के सेब का रोपण भी किया गया।

रघुवरदत्त अतिरिक्त आय के लिए वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन कर रहे हैं। इसके साथ ही गोबर और केंचुओं की मदद से वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर खेतों और बागानों में इस्तेमाल कर रहे हैं। उद्यान विभाग से मिले पौध, बीज, ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और तकनीकी सहयोग ने उनकी कृषि गतिविधियों को और मजबूती दी है।

वर्ष 2025-26 में ‘किसान की कहानी, किसान की जुबानी’ अभियान के तहत उनके खेत पर कृषक भ्रमण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इससे आसपास के किसानों को आधुनिक औद्यानिकी और वैज्ञानिक खेती अपनाने की प्रेरणा मिली।

जिलाधिकारी मनीष कुमार के निर्देशन में उद्यान विभाग द्वारा किसानों को पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई, फल उत्पादन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि चम्पावत की जलवायु फल एवं सब्जी उत्पादन के लिए अनुकूल है। आधुनिक तकनीक के जरिए किसानों की आय और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

रघुवरदत्त की सफलता यह साबित करती है कि आधुनिक सोच और वैज्ञानिक तकनीक के साथ पर्वतीय क्षेत्र में खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।


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