✍️सावन उत्सव में गूंजा मातृशक्ति का सम्मान, 10 कर्मठ महिलाओं को मिला ‘नंदा शिखर सम्मान👉

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गीता धामी बोलीं—महिलाएं हमारी संस्कृति, खेत और आजीविका की मुख्य धुरी; आत्मनिर्भर नारी ही सशक्त समाज की मजबूत नींव

टनकपुर। सेवा संकल्प फाउंडेशन की ओर से मातृशक्ति को समर्पित ‘सावन उत्सव-2026’ का भव्य आयोजन मिलन वाटिका, टनकपुर में हर्षोल्लास के साथ किया गया। भक्ति, लोक-संस्कृति, मनोरंजन और महिला सम्मान से सराबोर इस आयोजन में क्षेत्र की 10 कर्मठ महिलाओं को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘नंदा शिखर सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी गीता धामी ने महिलाओं को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति केवल घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाएं खेत, संस्कृति और आजीविका की भी मुख्य धुरी हैं। आज बेटियां शिक्षा, खेल, प्रशासन, उद्यमिता सहित हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और साहस का परिचय दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देना समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। ‘नंदा गौरा योजना’ बेटियों के जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक उनके सपनों को मजबूती देने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित बेटी न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज की सोच और दिशा बदलने की क्षमता रखती है।

आत्मनिर्भर बन रही हैं उत्तराखंड की महिलाएं

गीता धामी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होगा, जब महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें और अपनी पहचान स्वयं स्थापित करें। मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना और लखपति दीदी जैसी योजनाओं से प्रदेश की महिलाएं स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं ऐपण कला, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद, कृषि, पशुपालन, सिलाई-कढ़ाई और होमस्टे जैसे क्षेत्रों के माध्यम से न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रही हैं। सेवा संकल्प फाउंडेशन शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और मार्केटिंग के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।

10 कर्मठ महिलाओं को ‘नंदा शिखर सम्मान’

कार्यक्रम के दौरान स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं, शिक्षिकाओं, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं, आपातकालीन चिकित्सा सेवा में टेक्नीशियन के रूप में कार्यरत महिलाओं तथा क्षेत्र की प्रथम टुकटुक संचालिका सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली 10 कर्मठ महिलाओं को ‘नंदा शिखर सम्मान’ प्रदान किया गया।

सम्मानित महिलाओं को बधाई देते हुए गीता धामी ने कहा कि यह सम्मान उनके संघर्ष, मेहनत और समर्पण का प्रतीक है। ऐसी महिलाएं समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की मजबूत नींव तैयार कर रही हैं।

‘एक पौधा, प्रकृति के नाम’ का भी दिया संदेश

पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए गीता धामी ने ‘एक पौधा, प्रकृति के नाम’ अभियान के तहत चंदन का पौधा रोपा। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं को भी पौधे वितरित किए और पर्यावरण संरक्षण एवं अधिक से अधिक पौधरोपण का संकल्प दिलाया।

लोक संस्कृति और भक्ति के रंग में रंगा सावन उत्सव

सावन उत्सव में महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों और सोलह श्रृंगार में सजकर उत्तराखंड की लोक संस्कृति की खूबसूरत झलक प्रस्तुत की। कार्यक्रम में ‘सुपर ईंजा डांस प्रतियोगिता’ और रैंप वॉक आधारित ‘मिसेज सावन क्वीन-2026’ प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र रही। विजेता प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए, जबकि अन्य प्रतिभागियों का भी सहभागिता पुरस्कार देकर उत्साहवर्धन किया गया।

भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित नृत्य प्रस्तुतियों, ग्रुप डांस और नाट्य मंचन ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। वहीं सांतूं-आंठू (गौरा-महेश) और झोड़ा-चांचरी की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं से रूबरू कराया।

कार्यक्रम में ‘सावन सरप्राइज अवॉर्ड्स’ और विभिन्न मनोरंजक खेलों ने भी महिलाओं में उत्साह और उमंग भर दी। कार्यक्रम का संचालन कल्पना आर्य ने किया।

इस अवसर पर राज्य दर्जा मंत्री हेमा जोशी, किरन देवी, ब्लॉक प्रमुख अंचला बोहरा, जिलाध्यक्ष महिला मोर्चा दीपा जोशी, नगर पंचायत बनबसा अध्यक्ष रेखा देवी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष पुष्पा विश्वकर्मा, तुलसी कुंवर, जिला पंचायत सदस्य बनबसा सरोज चंद सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और महिलाएं मौजूद रहीं।


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