✍️देवीधुरा में 8 मिनट चली ऐतिहासिक बग्वाल, 180 योद्धा घायल👉

✍️देवीधुरा में 8 मिनट चली ऐतिहासिक बग्वाल, 180 योद्धा घायल👉

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चम्पावत                                                                  चम्पावत 👉 चम्पावत के प्रसिद्ध माँ वाराही धाम देवीधुरा में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सदियों पुरानी ऐतिहासिक बग्वाल परंपरा एक बार फिर जीवंत हो उठी। चार खाम और सात थोक के योद्धाओं के बीच खेली गई इस अनूठी पाषाण युद्ध परंपरा के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत हजारों श्रद्धालु साक्षी बने। दोपहर 1 बजकर 48 मिनट पर शुरू हुई बग्वाल करीब 8 मिनट तक चली और 1 बजकर 55 मिनट पर समाप्त हुई। इस दौरान पत्थरों की बारिश के बीच 180 बग्वाली घायल हुए, जिनका मौके पर बनाए गए स्वास्थ्य शिविरों में उपचार किया गया। तीन घायलों को बेहतर उपचार के लिए रेफर किया गया।

विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ वाराही धाम देवीधुरा…

रक्षाबंधन के मौके पर शुक्रवार को आस्था और परंपरा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। ऐतिहासिक बग्वाल को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु देवीधुरा पहुंचे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मेले में शामिल हुए। हेलीपैड पहुंचने पर उनका पारंपरिक छोलिया नृत्य के साथ स्वागत किया गया।

मुख्यमंत्री ने माँ वाराही देवी के दरबार में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं और देवीधुरा की बग्वाल परंपरा को उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और सामुदायिक सहभागिता की अनूठी मिसाल बताया।

बग्वाल की शुरुआत प्रधान पुजारी की पूजा-अर्चना के बाद हुई। इसके बाद चारों खामों—वालिक, चम्याल, गहड़वाल और लमगड़िया—के बग्वाली मैदान में पहुंचे। अलग-अलग रंगों के पारंपरिक परिधानों और पगड़ियों में सजे योद्धाओं के हाथों में बांस और रिंगाल से बनी ढालें थीं। शंखनाद और माँ वाराही के जयकारों के बीच बग्वाल का शुभारंभ हुआ।

फूलों और फलों की वर्षा के बीच जैसे ही बग्वाल शुरू हुई, पूरा मैदान माँ वाराही के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद दोनों पक्षों के बग्वाली वीरों ने एक-दूसरे पर पत्थर बरसाने शुरू किए। करीब आठ मिनट तक चले इस पारंपरिक पाषाण युद्ध में 180 योद्धा घायल हुए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगाए गए शिविरों में घायलों को तत्काल उपचार दिया गया, जबकि तीन लोगों को आगे के उपचार के लिए रेफर किया गया।

इस वर्ष बग्वाल दोपहर 1 बजकर 48 मिनट पर शुरू हुई और 1 बजकर 55 मिनट पर समाप्त हुई। सदियों से चली आ रही इस परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मैदान में मौजूद रहे। पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी ने बग्वाल को शुभ और फलदायी परंपरा बताया। खामों के आगमन और बग्वाल के संचालन की जिम्मेदारी भी पीठाचार्य कीर्तिबल्लभ जोशी ने निभाई।

देवीधुरा पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने क्षेत्र के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने लक्ष्मण सिंह लमगरिया की मांग पर देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की घोषणा की। साथ ही देवीधुरा में करीब 9 करोड़ 80 लाख रुपये की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग बनाए जाने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बग्वाल मेले को राजकीय मेला घोषित किए जाने से इसकी गरिमा बढ़ी है और व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के साथ-साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत धार्मिक स्थलों का विकास किया जा रहा है। देवीधुरा मंदिर परिसर में 4 करोड़ 27 लाख रुपये की लागत से गढ़वाल खाम भवन और 4 करोड़ 57 लाख रुपये की लागत से रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीते पांच वर्षों में धार्मिक अवस्थापना और सौंदर्यीकरण के तहत जिले में 68 करोड़ 58 लाख रुपये की लागत से 397 कार्य कराए गए हैं।

बग्वाल भले ही पाषाण युद्ध की अनूठी परंपरा है, लेकिन इसके पीछे भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश भी छिपा है। बग्वाल समाप्त होने के बाद सभी योद्धा एक-दूसरे से गले मिलकर आपसी सौहार्द का परिचय देते हैं। मुख्यमंत्री ने भी इस परंपरा को अनुशासन, भाईचारे और सांस्कृतिक विरासत की मिसाल बताया।

रक्षाबंधन के मौके पर बच्चियों और महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राखी बांधी और उनके साथ पर्व की खुशियां साझा कीं।

माँ वाराही के जयकारों के बीच संपन्न हुई देवीधुरा की ऐतिहासिक बग्वाल ने एक बार फिर उत्तराखंड की समृद्ध लोकपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत की झलक देश-दुनिया के सामने पेश की ।

 

 


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