✍️रेखा भट्ट ने संवारी अपनी तकदीर, अब पांच हजार समूहों के पहाड़ी उत्पादों को दिला रहीं बाजार👉

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पिथौरागढ़ UK                                                   पिथौरागढ़👉 विकासखंड बिण के घुनसेरा गांव की रेखा भट्ट आज महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़कर उन्होंने अपनी आजीविका को मजबूती देने के साथ ही ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी उल्लेखनीय काम किया है।

रेखा भट्ट हरु सैम देवता स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। एनआरएलएम के तहत उनके समूह को सीआईएफ से 75 हजार रुपये, सीसीएल के माध्यम से दो लाख रुपये और आरएफ के रूप में 25 हजार रुपये की वित्तीय सहायता मिली। उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए उन्होंने अपनी आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाया और समूह को भी सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में उनके कार्यों को देखते हुए वर्ष 2025 में उन्हें तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके संघर्ष, नेतृत्व क्षमता और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों की पहचान बना।

‘सरस’ केंद्र बना पहाड़ी उत्पादों का बाजार

रेखा भट्ट वर्तमान में एनआरएलएम के ‘सरस’ केंद्र का संचालन कर रही हैं। इस केंद्र से पिथौरागढ़ जिले के करीब पांच हजार स्वयं सहायता समूह जुड़े हुए हैं। इन समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार स्थानीय एवं पारंपरिक पहाड़ी उत्पादों को केंद्र के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।

‘सरस’ केंद्र में ग्रीन टी, हर्बल टी, बेरीनाग टी, मंडुवे के बिस्किट और आटा, मक्के का आटा, पहाड़ी राजमा, विभिन्न प्रकार की पहाड़ी दालें, शहद, पहाड़ी घी सहित कई स्थानीय उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इससे महिला समूहों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार मिलने के साथ उनकी आमदनी बढ़ाने के अवसर भी मिल रहे हैं।

रेखा भट्ट की सफलता यह संदेश देती है कि सरकारी योजनाओं, वित्तीय सहयोग और बाजार की सुविधा मिलने पर स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदलने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ ही अन्य महिलाओं के उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी संभाली है।

प्रदेश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। रेखा भट्ट की कहानी इसी दिशा में चल रहे प्रयासों की एक प्रेरक तस्वीर है।


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